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International Journal of
Research in Hindi
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VOL. 8, ISSUE 3 (2026)
संत शिरोमणि रैदास के काव्य में जाति-आधारित ऊँच-नीच का प्रतिवाद
Authors
बलवान सिंह
Abstract
संत शिरोमणि रैदास का काव्य भारतीय संत परंपरा में सामाजिक समता, मानवीय गरिमा और जाति-विरोधी चेतना का सशक्त दस्तावेज़ है। उन्होंने जन्म आधारित ऊँच-नीच, अस्पृश्यता तथा सामाजिक बहिष्कार का तार्किक, नैतिक और आध्यात्मिक स्तर पर प्रतिवाद करते हुए कर्म, भक्ति और मानव-मर्यादा को श्रेष्ठता का वास्तविक आधार माना। प्रस्तुत शोधपत्र में रैदास के काव्य में निहित जाति-विरोधी विमर्श का ऐतिहासिक, सामाजिक और दार्शनिक विश्लेषण किया गया है तथा समकालीन सामाजिक न्याय, संवैधानिक मूल्यों और लोकतांत्रिक चेतना के संदर्भ में उसकी प्रासंगिकता का मूल्यांकन किया गया है।
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Pages:33-37
How to cite this article:
बलवान सिंह "संत शिरोमणि रैदास के काव्य में जाति-आधारित ऊँच-नीच का प्रतिवाद". International Journal of Research in Hindi, Vol 8, Issue 3, 2026, Pages 33-37

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संत शिरोमणि रैदास के काव्य में जाति-आधारित ऊँच-नीच का प्रतिवाद | International Journal of Research in Hindi