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International Journal of
Research in Hindi
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VOL. 8, ISSUE 3 (2026)
दीवार में एक खिड़की रहती थी उपन्यास में दाम्पत्य भाव: आदर्श और यथार्थ का कथात्मक अन्वेषण
Authors
डॉ. मनीषा पाण्डेय तिवारी
Abstract
विनोद कुमार शुक्ल का उपन्यास “दीवार में एक खिड़की रहती थी” हिन्दी साहित्य में दाम्पत्य जीवन के अनूठे चित्रण के लिए जाना जाता है। इस उपन्यास में लेखक ने बिना किसी नाटकीयता या बड़ी घटना के, दैनिक जीवन की छोटी-छोटी घटनाओं द्वारा पति-पत्नी के संबंधों को दर्शाया है। उपन्यास का केन्द्रीय पात्र रघुवर प्रसाद और सोनसी आर्थिक रूप से विपिन्न है। परंतु उनके बीच प्रेम, सम्मान और गहरी समझ है। कमरे की छोटी सी खिड़की उनके लिए बाहरी दुनिया से जुड़ाव और आशा का प्रतीक बन जाती है। यह खिड़की उनके सीमित जीवन को विस्तार देती है और दाम्पत्य को जीवंत रखती है। प्रस्तुत शोध पत्र का उद्देश्य इस उपन्यास के माध्यम से भारतीय आदर्श दाम्पत्य के यथार्थ रूप का विश्लेषण करना है साथ ही यह देखना है कि संवादहीनता, आपसी सम्मान और परिवार के सहयोग से रिश्ते कैसे मजबूत होते है। वर्तमान समय में जब संयुक्त परिवार टूट रहे है और वैवाहिक संबंध कमजोर हो रहे हैं, तब यह उपन्यास हमारे लिए प्रासंगिक दर्पण है। यह प्रतिपादित करता है कि दाम्पत्य सुख के लिए भौतिक समृद्वि नही, बल्कि भावात्मक जुड़ाव आवश्यक है।
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Pages:16-17
How to cite this article:
डॉ. मनीषा पाण्डेय तिवारी "दीवार में एक खिड़की रहती थी उपन्यास में दाम्पत्य भाव: आदर्श और यथार्थ का कथात्मक अन्वेषण". International Journal of Research in Hindi, Vol 8, Issue 3, 2026, Pages 16-17

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