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International Journal of
Research in Hindi
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VOL. 8, ISSUE 3 (2026)
मिथलेश्वर की रचनाओं की कथा संरचना पर पौराणिक कथाओं का प्रभाव: एक अध्ययन
Authors
चन्द्र कान्त, डॉ. रुखसाना खातून
Abstract
भारतीय साहित्य के प्रमुख लेखको में से एक, मिथिलेश्वर में अद्वितीय कहानी-लेखन कला और जटिल नमूनों को अपने रूप में आगे बढ़ाने की क्षमता के रूप में दर्शाया गया है। उनके भारतीय पुरालेख पौराणिक कथाओं की गहराई में रचे-बसे हुए होते हैं और अक्सर रामायण तथा महाभारत जैसे प्राचीन महाकाव्यों से प्रेरणा प्राप्त होती हैं। इस शोध पत्र का सारांश मिथिलेश्वर की साहित्यिक रचनाओं की कथा संरचना पर पौराणिक कथाओं के प्रभाव पर केंद्रित है। इस अध्ययन का उद्देश्य यह विश्लेषण करना है कि इन प्राचीन कथाओं ने मिथिलेश्वर की रचनाओं में पात्रों, कथानक और विषयों के निर्माण को किस प्रकार प्रभावित किया है। यह शोधपत्र भारत के एक प्रसिद्ध लेखक मिथिलेश्वर के संक्षिप्त परिचय से शुरू होता है, जो अपनी अनूठी शैली और रचनाओं में पौराणिक कथाओं के उपयोग के लिए जाने जाते हैं। इसके बाद यह साहित्य पर पौराणिक कथाओं के प्रभाव के अध्ययन की पृष्ठभूमि और महत्व पर विस्तार से चर्चा करता है। इस शोध से पता चलता है कि पौराणिक कथाओं ने मिथिलेश्वर की रचनाओं की कथा संरचना को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। लेखक ने पौराणिक तत्वों को समकालीन विषयों के साथ खूबसूरती से पिरोया है, जिससे एक अनूठा मिश्रण तैयार हुआ है जो पाठकों का ध्यान आकर्षित करता है। 
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Pages:4-7
How to cite this article:
चन्द्र कान्त, डॉ. रुखसाना खातून "मिथलेश्वर की रचनाओं की कथा संरचना पर पौराणिक कथाओं का प्रभाव: एक अध्ययन". International Journal of Research in Hindi, Vol 8, Issue 3, 2026, Pages 4-7
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