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International Journal of
Research in Hindi
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VOL. 8, ISSUE 3 (2026)
धनानंद की प्रेम-व्यंजना
Authors
डॉ॰लक्ष्य सिंह चौधरी
Abstract

प्रस्तुत आलेख रीतिमुक्त काव्यधारा के प्रतिनिधि कवि धनानंद की प्रेम-व्यंजना और उनकी अनुभूति की प्रामाणिकता का विश्लेषण करता है। धनानंद का काव्य 'प्रेम की पीर', आत्म-समर्पण और एकनिष्ठता पर आधारित है। उनका प्रेम-वर्णन किसी बाह्य आडंबर या अतिभावुकता से मुक्त होकर लौकिक प्रेम से आध्यात्मिक भक्ति (राधा-कृष्ण) की ओर अग्रसर होता है। आलेख में संयोग और विशेष रूप से वियोग श्रृंगार के विभिन्न पक्षों, मौन की व्यंजना, और विरोधी अभिव्यंजना का अध्ययन किया गया है। साथ ही, आचार्य रामचंद्र शुक्ल, डॉ. रामस्वरूप चतुर्वेदी और डॉ. बच्चन सिंह जैसे आलोचकों के कथनों के माध्यम से धनानंद की विशुद्ध ब्रजभाषा और उनके काव्य की अनूठी विलक्षणता को रेखांकित किया गया है

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Pages:30-32
How to cite this article:
डॉ॰लक्ष्य सिंह चौधरी "धनानंद की प्रेम-व्यंजना". International Journal of Research in Hindi, Vol 8, Issue 3, 2026, Pages 30-32

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धनानंद की प्रेम-व्यंजना | International Journal of Research in Hindi