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International Journal of
Research in Hindi
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VOL. 8, ISSUE 3 (2026)
हिमाचल प्रदेश की टाकरी (टांकरी) लिपिः एक ऐतिहासिक एवं भाषाई विश्लेषण
Authors
संगीता मीणा, डॉ बिजय कुमार प्रधान
Abstract
संक्षेपः प्रस्तुत शोध पत्र में हिमाचल प्रदेश की भाषाई विविधता, पहाड़ी भाषा समूह की उत्पत्ति, विभिन्न भौगोलिक अंचलों में प्रचलित उपभाषाओं (बोलियों) तथा ऐतिहासिक लिपियों के क्रमिक विकास का व्यवस्थित अध्ययन प्रस्तुत किया गया है। ऐतिहासिक दृष्टिकोण देखा जाये तो इस देवभूमि में प्रचुर मात्र में पांडुलिपियाँ, ताम्रपत्र और शिलालेख उपलब्ध हैं, जो ब्राह्मी, खरोष्ठी, कुटिल, शारदा और विशेष रूप से ‘टाकरी‘ (नागरी और महाजनी के समानांतर) लिपि के समृद्ध इतिहास को प्रमाणित करते हैं। इस शोध में स्कन्दपुराण के ऐतिहासिक वर्गीकरण (जालन्धर खण्ड) से लेकर आधुनिक भाषाविदों (जैसे डॉ. ग्रियर्सन, मौलूराम ठाकुर, डॉ. यशवंत सिंह परमार और डॉ. ओम प्रकाश शर्मा) के वर्गीकरणों की समीक्षा की गई है। निष्कर्षतः यह पत्र स्पष्ट करता है कि पहाड़ी भाषा का मूलाधार संस्कृत और प्राकृत है तथा पश्चिमी पहाड़ी भाषाई विन्यास के अंतर्गत टाकरी लिपि का प्रचलन 16वीं से 20वीं शताब्दी के पूर्वार्ध तक अत्यंत व्यापक था।
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Pages:18-19
How to cite this article:
संगीता मीणा, डॉ बिजय कुमार प्रधान "हिमाचल प्रदेश की टाकरी (टांकरी) लिपिः एक ऐतिहासिक एवं भाषाई विश्लेषण". International Journal of Research in Hindi, Vol 8, Issue 3, 2026, Pages 18-19

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