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International Journal of
Research in Hindi
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VOL. 8, ISSUE 3 (2026)
स्वतंत्र्योत्तर हिंदी विज्ञान कथा साहित्य में भविष्य की झलक
Authors
कविता लिटौरिया, डॉ0 के0 सी0 जैन
Abstract
हिंदी साहित्य में विज्ञान कथा एक उभरती हुई विधा है जो वैज्ञानिक प्रगति, प्रौद्योगिकी और भविष्य की संभावनाओं को कल्पनाशील रूप से चित्रित करती है। यह शोध पत्र हिंदी विज्ञान कथाओं में भविष्य की झलक का विश्लेषण करता है, जिसमें कहानियाँ, नाटक और उपन्यास शामिल हैं। 19वीं शताब्दी से शुरू हुई इस परंपरा में लेखक जैसे अंबिका दत्त व्यास, देवकी नंदन खत्री, राहुल सांकृत्यायन, देवेंद्र मेवाड़ी, अरविंद मिश्र, जयंत विष्णु नार्लीकर, हरीश गोयल और जीशान हैदर जैदी ने भविष्य के समाज, अंतरिक्ष यात्रा, पर्यावरणीय चुनौतियाँ, कृत्रिम बुद्धि और नैतिक मुद्दों को उजागर किया है। अध्ययन से पता चलता है कि ये रचनाएँ न केवल मनोरंजन करती हैं बल्कि वर्तमान की समस्याओं पर चिंतन भी कराती हैं, जैसे तकनीकी दुरुपयोग, मानवीय मूल्य और पर्यावरण संरक्षण, बल्कि भविष्य की झलक इनमें आशावादी और चेतावनीपूर्ण दोनों रूपों में दिखाई देती है, जो हिंदी साहित्य की विविधता को समृद्ध करती है। अधिक विस्तृत उदाहरणों के माध्यम से यह स्पष्ट होता है कि विज्ञान कथा भविष्य की तैयारी का सशक्त माध्यम है।
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Pages:14-15
How to cite this article:
कविता लिटौरिया, डॉ0 के0 सी0 जैन "स्वतंत्र्योत्तर हिंदी विज्ञान कथा साहित्य में भविष्य की झलक". International Journal of Research in Hindi, Vol 8, Issue 3, 2026, Pages 14-15

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