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VOL. 6, ISSUE 1 (2024)
जनजातीय परंपराएँ, पर्यावरण और सतत विकास: एक समीक्षा
Authors
राठोड बाबासाहेब हरिभाऊ, डॉ. ममता रानी
Abstract
यह समीक्षा शोध पत्र भारतीय जनजातीय समुदायों की विशिष्ट सांस्कृतिक, सामाजिक, भाषाई तथा पर्यावरणीय विशेषताओं का व्यापक अध्ययन प्रस्तुत करता है। अध्ययन में यह स्पष्ट किया गया है कि जनजातीय समाज का जीवन प्रकृति के साथ गहरे संबंध पर आधारित है, जहाँ पर्यावरण संरक्षण केवल एक सामाजिक दायित्व नहीं बल्कि जीवन-दर्शन का अभिन्न अंग है। जनजातीय समुदायों की प्रकृति-पूजा, पारंपरिक ज्ञान प्रणाली, स्वायत्त शासन व्यवस्था तथा मौखिक भाषाई परंपराएँ उनकी सांस्कृतिक पहचान को सुदृढ़ बनाती हैं। शोध में यह भी उल्लेखित किया गया है कि आधुनिक विकास प्रक्रियाओं, औद्योगीकरण तथा विस्थापन के कारण जनजातीय समुदायों के अस्तित्व, भाषा और संस्कृति पर गंभीर संकट उत्पन्न हुआ है। इसके बावजूद जनजातीय समाज आज भी अपने पारंपरिक मूल्यों, पर्यावरणीय संतुलन तथा सामुदायिक जीवन शैली को संरक्षित रखने के लिए निरंतर संघर्षरत है। अध्ययन यह निष्कर्ष प्रस्तुत करता है कि सतत विकास, पर्यावरण संरक्षण तथा सामाजिक न्याय की स्थापना के लिए जनजातीय समुदायों की पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों और जीवन मूल्यों को समझना तथा उन्हें विकास नीतियों में प्राथमिकता देना अत्यंत आवश्यक है।
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Pages:28-31
How to cite this article:
राठोड बाबासाहेब हरिभाऊ, डॉ. ममता रानी
"जनजातीय परंपराएँ, पर्यावरण और सतत विकास: एक समीक्षा". International Journal of Research in Hindi, Vol 6, Issue 1, 2024, Pages 28-31
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